Book Name:Bahan Bhaiyon Ke Sath Husne Sulook
बयान कर्दा अह़ादीसे मुबारका से उन लोगों को दर्से इ़ब्रत ह़ासिल करना चाहिये जो ज़रा ज़रा सी बात पर अपनी बहनों, बेटियों, फूफियों, ख़ालाओं, भतीजों, भान्जों वग़ैरा से क़त़ए़ रेह़मी कर लेते हैं । अगर हम में से किसी की किसी रिश्तेदार या अपने बहन, भाइयों में से किसी से नाराज़ी हो, तो उन को राज़ी कर लीजिये अगर्चे उन्ही का क़ुसूर हो, सुल्ह़ के लिये ख़ुद पहल कीजिये और ख़ुद आगे बढ़ कर ख़न्दा पेशानी या'नी खुले दिल के साथ उस से मिल कर तअ़ल्लुक़ात संवार लीजिये, अगर मुआफ़ी मांगने में पहल भी करनी पड़े, तो रिज़ाए इलाही के लिये मुआफ़ी मांगने में पहल कर लेनी चाहिये, اِنْ شَآءَ اللہ عَزَّ وَجَلَّ सर बुलन्दी पाएंगे ।
फ़रमाने मुस्त़फ़ा صَلَّی اللّٰہُ تَعَالٰی عَلَیْہِ واٰلِہٖ وَسَلَّمَ है : مَنْ تَوَاضَعَ لِلّٰہِ رَفَعَہُ اللّٰہ जो अल्लाह पाक के लिये आजिज़ी करता है, अल्लाह पाक उसे बुलन्दी अ़त़ा फ़रमाता है । (شُعَبُ الْاِیمان ج ٦ ص ٢٧٦ حدیث ٨١٤٠) लिहाज़ा हमेशा अपने बहन, भाइयों, रिश्तेदारों से बना कर रखिये, उन के साथ ह़ुस्ने सुलूक का मुज़ाहरा करते रहिये क्यूंकि इस में फ़ाइदा ही फ़ाइदा है ।
मीठी मीठी इस्लामी बहनो ! हमारे प्यारे दीने इस्लाम ने हमें अपने बड़ों का एह़तिराम सिखाया है, हमारे बड़ों में, बड़े भाई का मक़ामो मर्तबा भी अदब के लाइक़ है । बड़े भाई के दिल में अल्लाह पाक की त़रफ़ से छोटे बहन भाइयों के लिये वालिद जैसी शफ़्क़त व मह़ब्बत रखी जाती है । बड़ा भाई वालिद की मौजूदगी में तो छोटों का ख़याल रखता है, उन की ज़रूरतों को पूरा भी करता है और अगर वालिद का सायए शफ़्क़त उठ जाए, तो बा'द में भी अपनी ज़िम्मेदारियां अच्छे त़रीके़ से निभाता है । बड़े भाई के इतने एह़सानात इस बात का तक़ाज़ा करते हैं कि छोटे बहन भाई उन का अदब करें, उन की इ़ज़्ज़त व तौक़ीर करते हुवे उन के शायाने शान मक़ामो मर्तबा दें, वालिदैन की ग़ैर मौजूदगी में उन्हें अपने वालिदैन का मर्तबा दें, वरना उन्हें अपना सरपरस्त ज़रूर समझें, उन की ग़ीबत, चुग़ली, उन के साथ लड़ाई, झगड़ा और उन के