Faizan e Imam Bukhari

Book Name:Faizan e Imam Bukhari

          سُبْحٰنَ اللّٰہ ! आप ने सुना कि ह़ज़रते सय्यिदुना इमाम बुख़ारी رَحْمَۃُ اللّٰہ ِ عَلَیْہ का ह़ाफ़िज़ा कितना शानदार था ! आप رَحْمَۃُ اللّٰہ ِ عَلَیْہ ने बचपन ही में न सिर्फ़ सत्तर हज़ार से ज़ाइद अह़ादीसे करीमा को याद फ़रमा लिया बल्कि उन ह़दीसों को रिवायत करने वाले अक्सर बुज़ुर्गों की तारीख़े पैदाइश, रिहाइश और तारीख़े विसाल को भी याद कर लिया । बिला शुबा येह अल्लाह पाक के ख़ास फ़ज़्लो एह़सान और नबिय्ये करीम صَلَّی اللّٰہُ عَلَیْہِ واٰلِہٖ وَسَلَّمَ के ख़ुसूसी फै़ज़ान का कमाल था कि लोग आप رَحْمَۃُ اللّٰہ ِ عَلَیْہ की याद रखने वाली क़ुव्वत की ता'रीफ़ किया करते थे जब कि आज हमारे ह़ाफ़िज़े कमज़ोर (Weak) होते जा रहे हैं, हमें तो गुज़रे हुवे कल की मा'मूली बातें भी याद नहीं रहतीं, ई़सवी महीने और उन की तारीख़ें तो याद रहती हैं मगर अफ़्सोस ! मदनी या'नी चांद के महीनों और उन की तारीख़ों से बे ख़बर रहते हैं, चीज़ों के ह़िसाब किताब में अक्सर परेशानी का शिकार हो जाते हैं, नमाज़ों की रक्आ़त के बारे में शुकूको शुब्हात में मुब्तला हो जाते हैं कि कितनी पढ़ लीं और कितनी बाक़ी रह गईं ? किसी किताब या रिसाले को कई कई बार पढ़ लेने के बा वुजूद भी उस के मज़ामीन या मसाइल हमारे दिलो दिमाग़ में मह़फ़ूज़ नहीं हो पाते । बहर ह़ाल अगर हम अपने ह़ाफ़िज़े को मज़बूत़ बनाना चाहते हैं, भूलने की बीमारी से नजात पाना चाहते हैं, ह़ाफ़िज़े को मज़बूत़ बनाने के त़रीके़ जानना चाहते हैं और भूलने की बीमारी पैदा करने वाले अस्बाब के बारे में मा'लूमात ह़ासिल करना चाहते हैं, तो इस के लिये मक्तबतुल मदीना की किताब "ह़ाफ़िज़ा कैसे मज़बूत़ हो ?" का मुत़ालआ़ फ़रमाइये । दा'वते इस्लामी की वेबसाइट www.dawateislami.net से इस किताब को पढ़ा भी जा सकता है, डाउन लोड (Download) और प्रिन्ट आउट (Print Out) भी किया जा सकता है ।

ह़ाफ़िज़ा मज़बूत़ करने का आसान वज़ीफ़ा

اَللّٰھُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ وَبَارِکْ عَلٰی سَیِّدِنَا مُحَمَّدِ نِ النَّبِیِّ الْکَامِلِ وَعَلٰی اٰلِہٖ کَمَا لَا نِھَایَۃَ لِکَمَالِکَ وَعَدَدَ کَمَالِہٖ

          शैख़े त़रीक़त, अमीरे अहले सुन्नत دَامَتْ بَرْکَاتُھُمُ الْعَالِیَہ इस दुरूदे पाक की फ़ज़ीलत नक़्ल फ़रमाते हैं : अगर किसी शख़्स को निस्यान या'नी भूल जाने की बीमारी हो, तो वोह मग़रिब और इ़शा के दरमियान इस दुरूदे पाक को कसरत से पढ़े, اِنْ شَآءَ اللّٰہ ह़ाफ़िज़ा क़वी हो जाएगा । (मदनी पंजसूरह, स. 169)

صَلُّوْا عَلَی الْحَبِیْب!      صَلَّی اللّٰہُ عَلٰی مُحَمَّد

          प्यारे प्यारे इस्लामी भाइयो ! उ़मूमन देखा गया है कि जब कोई शख़्स अपने किसी कारनामे के सबब अ़वाम व ख़वास में मश्हूर हो जाए, तो वोह अपने आप को "कुछ" समझने लगता है, दूसरों को ह़क़ारत की नज़र से देखता है, अपने काम काज अपने हाथों से करने में शर्म और ज़िल्लत मह़सूस करता है, दुन्यवी ह़िर्स व लालच और मज़ीद शोहरत का भूत उस पर सुवार हो जाता है और वोह दुन्यवी लज़्ज़ात में डूब कर फ़िक्रे आख़िरत से ग़ाफ़िल हो जाता है लेकिन क़ुरबान जाइये ! ह़ज़रते सय्यिदुना इमाम बुख़ारी رَحْمَۃُ اللّٰہ ِ عَلَیْہ पर ! लाखों ह़दीसें याद कर लेने के बा वुजूद ग़ुरूरो तकब्बुर को कभी अपने क़रीब भी भटकने न दिया,