Book Name:Faizan e Imam Bukhari
बुख़ारी किया जाता है, जिस की बरकत और अल्लाह पाक के फ़ज़्ल से मुसीबतें टल जाती हैं । (मिरआतुल मनाजीह़, 1 / 11, मुलख़्ख़सन)
صَلُّوْا عَلَی الْحَبِیْب! صَلَّی اللّٰہُ عَلٰی مُحَمَّد
ऐ आ़शिक़ाने रसूल ! आप ने सुना कि "सह़ीह़ बुख़ारी" कैसी बरकतों वाली किताब है और इस की बरकत से कैसे कैसे मसाइल ह़ल हो जाते हैं । तो आइये ! आप भी फै़ज़ाने इमाम बुख़ारी और फै़ज़ाने सह़ीह़ बुख़ारी से माला माल होने के लिये आ़शिक़ाने रसूल की मदनी तह़रीक दा'वते इस्लामी के मदनी माह़ोल से वाबस्ता हो कर ख़िदमते दीन के लिये अपनी ख़िदमात पेश कीजिये । اَلْحَمْدُ لِلّٰہ ! आ़शिक़ाने रसूल की मदनी तह़रीक दा'वते इस्लामी दुन्या भर में ख़िदमते दीन के कमो बेश 107 शो'बाजात में सुन्नतों की धूमें मचा रही है, जिन में से एक शो'बा "मजलिसे इस्लाह़ बराए क़ैदियान" भी है । اَلْحَمْدُ لِلّٰہ ! इस मजलिस के ज़रीए़ मुसलमान कै़दियों की सुन्नतों भरी तरबिय्यत के लिये दुन्या के कई जेलख़ानों (Jails) में मदनी काम की तरकीब है । मुल्के अमीरे अहले सुन्नत की कई जेलों में ता'लीमे क़ुरआन के लिये मद्रसे क़ाइम हो चुके हैं, اِنْ شَآءَ اللّٰہ तमाम जेलों में येह मदारिस क़ाइम किये जाएंगे । कई जेलों में रोज़ाना शैख़े त़रीक़त, अमीरे अहले सुन्नत دَامَتْ بَرْکَاتُھُمُ الْعَالِیَہ के रसाइल से दर्स दिया जाता है, मुख़्तलिफ़ जेलों में माहाना व हफ़्तावार इजतिमाए़ ज़िक्रो ना'त का सिलसिला भी होता है, दुख्यारे कै़दियों को "मजलिसे मक्तूबातो ता'वीज़ाते अ़त़्त़ारिय्या" के दिये हुवे ता'वीज़ात फ़ी सबीलिल्लाह पहुंचाए जाते हैं, रिहाई पाने वालों की तरबिय्यत के लिये मुख़्तलिफ़ कोर्सिज़ का एहतिमाम किया जाता है, मसलन 41 दिन का मदनी इनआ़मात व मदनी क़ाफ़िला कोर्स, 63 दिन का मदनी तरबिय्यती कोर्स, 12 रोज़ा मदनी कोर्स, इमामत कोर्स और मुदर्रिस कोर्स वग़ैरा ।
صَلُّوْا عَلَی الْحَبِیْب! صَلَّی اللّٰہُ عَلٰی مُحَمَّد
ऐ आ़शिक़ाने औलिया ! उ़मूमन एक आ़म इन्सान जब तक दुन्या में ज़िन्दा रहता है, उस वक़्त तो वोह दूसरों को फ़ाइदा पहुंचाने पर क़ुदरत रखता है मगर मरते ही येह सिलसिला ख़त्म हो जाता है मगर औलियाए किराम رَحْمَۃُ اللّٰہ ِ عَلَیْہِمْ اَجْمَعِیْن की शानो अ़ज़मत इस क़दर बुलन्दो बाला होती है कि जब तक येह ह़ज़रात इस दुन्याए फ़ानी में अपनी ज़ाहिरी ह़यात के साथ मौजूद रहते हैं, तो नेक हों या बुरे सभी को फै़ज़याब फ़रमाते और हर त़रफ़ अपनी बरकतें लूटाते हैं फिर जब येह ह़ज़रात अपने मज़ारे अक़्दस में तशरीफ़ ले जाते हैं, तो वहां भी उन की ज़ात और उन के मज़ार शरीफ़ से बरकात ज़ाहिर होती रहतीं और लोग फै़ज़याब होते रहते हैं । आइये ! बा'दे विसाल ह़ज़रते सय्यिदुना इमाम बुख़ारी رَحْمَۃُ اللّٰہ ِ عَلَیْہ की एक करामत और आप رَحْمَۃُ اللّٰہ ِ عَلَیْہ के मज़ार शरीफ़ की एक बरकत मुलाह़ज़ा कीजिये । चुनान्चे,